22 Apr 2012

पूर्ण टीकाकरण के लिए बालाघाट फार्मूला

Article contributed by Mr. Pankaj Shukla, City Bureau Head,  Navdunia, Bhopal, Madhya Pradesh


त्रिस्तरीय व्यवस्था से सुध्ाारी स्थिति
बालाघाट। नक्सलियों के लिए 'सॉफ्ट टॉरगेट" बना बालाघाट जिला बच्चों के टीकाकरण के लिए 'आशा की किरण" बन गया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा करवाए जाने वाले सर्वे डीएलएचएस-3 (डिस्ट्रीक लेवल हाऊस होल्ड सर्वे-3) के मुताबिक इस जिले में 75  फीसदी बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ है। यहाँ जन्में 90 फीसदी बच्चों को खसरे का टीका लगाया गया। जबकि झाबुआ, अलीराजपुर, शिवपुरी, टीकमगढ़, बड़वानी जैसे जिलों में 30 फीसदी बच्चों को भी खसरे का टीका नहीं  लग पाता है। अममून पिछड़ा जिला माने जाने वाले बालाघाट में टीकाकरण की यह उपलब्ध्ाि स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग, कुशल रणनीति और सतत निगरानी की वजह से मिली है। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और आशा कार्यकर्ता की तिकड़ी, सतत निगरानी और कैचअप राउंड का यह फार्मूला अन्य जिलों के लिए आदर्श है। 



बच्चों की असमय होने वाली मौत को रोकने के लिए मध्यप्रदेश में पूर्ण टीकाकरण बड़ी चुनौती बना हुआ है। देश में हर साल एक लाख 80 हजार बच्चे केवल खसरे की बीमारी की वजह से मर जाते हैं। इन मौतों में मप्र का हिस्सा आठ से 10 फीसदी है। टीकाकरण खसरे से बचाव का कारगर उपाय हो सकता है। खसरे से बचाव के शिशु को 9 माह की उम्र में टीका लगाया जाता है। खसरा श्वसन तंत्र का एक घातक बेहद संक्रामक रोग है। जिन शिशुओं को खसरा का संक्रमण होता हैं उनमें से बहुत से शिशुओं को सीने का संक्रमण, दौरे दिमागी क्षति सरीखे कई गंभीर नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।  मप्र में खसरा टीकाकरण की बात करें तो कुल 57.7 प्रतिशत बच्चों को ही खसरा से बचाव के लिए जरूरी टीके लग पाए हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण किए हुए बच्चे महज 53.6 प्रतिशत ही हैं। 
पूर्ण टीकाकरण की स्थिति कुछ ओर हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग के हेल्थ बुलेटिन के अनुसार 2007-08 में 62.5 प्रतिशत, 2007-08 में 62.5 प्रतिशत तथा 2008-09 में 63.6 प्रतिशत बच्चों को बाल टीकाकरण योजना के तहत पूरी तरह रोग प्रतिरोधी टीकाकरण किया गया। जनसंख्या शोध केंद्र, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने मध्यप्रदेष के बच्चों के टीकाकरण के संदर्भ में एक शोध रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार 12 से 36 माह की आयु के बच्चों में से केवल 47 फीसदी बच्चों का ही पूर्ण टीकाकरण हो पाया है। तब के 45 जिलोें में से 3 जिलों में 75-100 फीसदी, 21 जिलों में 50-74 फीसदी, 17 में 25-49 फीसदी और 4 जिलों में 0-24 फीसदी तक टीकाकरण हुआ है। बालाघाट जिला अव्वल स्थान पर है, यहां 90 फीसदी बच्चों का टीकाकरण हुआ है। पन्नाा में केवल 11 फीसदी बच्चे ही टीकाकरण का लाभ उठा पाए हैं। 
तमाम विपरित परिस्थितियों के बाद भी बालाघाट जिले का यह प्रदर्शन पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य पाने की उम्मीद जगाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बालाघाट में इस लक्ष्य को पाने के लिए बहुत बड़ा काम कर छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान दे कर बड़ा लक्ष्य पाया गया है। मसलन, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम के बाद आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दे कर पूरी तरह टीकाकरण के लिए तैयार किया गया। उनकी समस्या सुनी गई और उनका निराकरण हुआ। दूसरा, हर स्तर पर निगरानी को कड़ा किया गया। अंतिम चरण में गाँवों में घर-घर जा कर बच्चों को खोज कर टीके लगाए गए। यह कैच अप राउंड कारगर साबित हुआ। जिला टीकाकरण अध्ािकारी डॉ. राकेश पंड्या कहते हैं कि इन तीन स्तरों पर की गई कोशिशों ने हमारा हौंसला बढ़ाया। 
साफ है कि लक्ष्य से पिछड़ जाने और कम उपलब्ध्ाि का रोना रोने की बजाय लगातार प्रयास करते रहने से ही सफलता मिलती है। बालाघाट इसका उदाहरण है।

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