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15 Nov 2011

झारखंड में खसरे के खिलाफ अभियान


 
झारखंड में शिशु मृत्यु दर उत्तरी राज्यों में सबसे कम    
                         
रांचीः मंगलवार को बारहवां स्थापना दिवस मनाने जा रहे झारखंड राज्य में तमाम कठिनाइयों के बावजूद शिशु मृत्यु दर घटकर सिर्फ़ 41 रह गयी है, जो उत्तर प्रदेश की 70 बच्चों की शिशु मृत्यु दर की लगभग आधी ही हैं. 

संयुक्त राष्ट अंतरराष्ट्रीय बाल आकस्मिक कोष यूनिसेफ़ के झारखंड प्रमुख जाब जकारिया ने बताया कि शिशु मृत्यु दर कम करने के अंतरराष्ट्रीय मानक को हासिल करने की दिशा में झारखंड ने बडी सफ़लता हासिल की है. नवीनतम आंकडों के अनुसार यहां शिशु मृत्यु दर नौ प्रमुख उत्तरी राज्यों में सबसे अधिक घटकर सिर्फ़ 41 रह गयी है, जबकि इन नौ राज्यों में से उत्तर प्रदेश में शिशु मृत्यु दर अभी भी सर्वाधिक सत्तर है. इतना ही नहीं इन नौ प्रमुख उत्तर के राज्यों में झारखंड में मृत्यु दर भी घटकर सिर्फ़ छह रह गयी है, जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे बुरा हाल है और वहां मृत्यु दर प्रति एक हजार जनसंख्या पर लगभग 8. 5 है.

उन्होंने बताया कि भारत का औसत शिशु मृत्यु दर भी 48. 2 है, जो झारखंड के 41 के आंकडे से लगभग सत्रह प्रतिशत अधिक है. इतना ही नहीं झारखंड के दो जिलों जमशेदपुर और धनबाद ने तो शिशु मृत्यु दर घटाकर क्रमश 26 और 28 हो गयी है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य के अनुकूल है. जॉब ने बताया कि प्रति एक हजार शिशु जन्म पर सहस्त्राब्दि लक्ष्य अधिकतम 28 रखा गया है. यह लक्ष्य सभी देशों को वर्ष 2015 तक प्राप्त करना है. झारखंड की राजधानी रांची और औद्योगिक शहर बोकारो भी इस लक्ष्य के बिलकुल निकट हैं और इन दोनों जिलों में शिशु मृत्यु दर क्रमशः सिर्फ़ 35 और 29 ही रह गयी है.

                                                   
12 नवम्बर, 2011

58 लाख बच्चों को दिये जाएंगे खसरे के टीके 

रांची, राज्य सरकार और यूनिसेफ के सहयोग से खसरे के खिलाफ एक बड़े अभियान की शुरुआत 19 जिलों में होगी। इन जिलों में नौ महीने से लेकर 10 वर्ष तक के आयु वर्ग के 58 लाख बच्चों को खसरे के टीके दिये जाएंगे। 18 नवंबर से दस जिले में और दो दिसंबर से 9 जिले में खसरा टीकाकरण अभियान को शुरू किया जाएगा। इससे पहले इसी वर्ष 31 जनवरी को 5 जिलों में आठ लाख बच्चों को खसरे के टीके दिये गये थे।
आज यहां आयोजित मीडिया उन्मुखीकरण कार्यक्रम में यूनिसेफ के झारखंड प्रमुख जॉब जकारिया ने बताया कि झारखंड में प्रतिवर्ष दो हजार बच्चे खसरे की वजह से मरते हैं। अगर खसरे से बचाव कर लिया जाय तो झारखंड में शिशु मृत्यु दर कम हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को सही पोषण हो और बच्चों के स्तनपान करने को बढ़ावा दिया जाए तो वर्ष 2015 तक शिशु मृत्यु दर में कमी होगी और झारखंड वर्ष 2015 तक मिलेनियम डेवलपमेंट लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। वर्तमान में झारखंड में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) एक हजार बच्चों पर 40 है। जबकि राष्ट्रीय औसत एक हजार पर 50 है। हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2015 तक शिशु मृत्यु दर को एक हजार पर 28 तक लाया जा सकता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करना असंभव नहीं है। चूंकि पूर्वी सिंहभूम जैसे जिलों इसे पहले ही प्राप्त किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कैचअप राउण्ड के बाद सभी बच्चों को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत प्रथम नौ महीने और फिर दूसरी बार 16 महीने में डीपीटी बूस्टर के साथ खसरे के टीके दिये जाएंगे। वर्तमान में बच्चों के जीवन में सिर्फ एक बार ही यह टीके दिये जाते हैं। 





8 Oct 2011

खसरा टीकाकरण के लिए भेजे जाएंगे निमंत्रण पत्र

मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चम्बल सम्भाग के सात जिलों में 12 सितम्बर से खसरा टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है। तीन सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान में 20 लाख बच्चों को टीका लगाया जाएगा। इस अभियान के दौरान नौ माह से लेकर 10 वर्ष की आयु के बच्चों को स्कूलों और आंगनवाडी केंद्रों में टीके लगाए जाएंगे।

ग्वालियर में महिला बाल विकास विभाग व संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ ) द्वारा आयोजित मीडिया कार्यशाला में बताया गया कि ग्वालियर-चम्बल सम्भाग के सात जिलों ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना, अशोकनगर, दतिया, गुना और श्योपुर में तीन सप्ताह तक टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में लोगों को सीधे तौर पर जोड़ने के लिए आमंत्रण पत्र बांटे जाएंगे।

इस आमंत्रण पत्र के माध्यम से टीकाकरण कराने वाले बच्चों तथा उनके माता-पिता के साथ-साथ आंगनवाड़ी, आशा तथा एएनएम का नाम दर्ज किया जाएगा। यूनीसेफ के चिकित्सक डॉ. गगन गुप्ता ने बताया कि आमंत्रण पत्र उन परिवारों को भेजे जाएंगे, जिनके बच्चे टीकाकरण की उम्र की सीमा में आते हैं।