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10 Oct 2011
8 Oct 2011
खसरा टीकाकरण के लिए भेजे जाएंगे निमंत्रण पत्र
मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चम्बल सम्भाग के सात जिलों में 12 सितम्बर से खसरा टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है। तीन सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान में 20 लाख बच्चों को टीका लगाया जाएगा। इस अभियान के दौरान नौ माह से लेकर 10 वर्ष की आयु के बच्चों को स्कूलों और आंगनवाडी केंद्रों में टीके लगाए जाएंगे।
ग्वालियर में महिला बाल विकास विभाग व संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ ) द्वारा आयोजित मीडिया कार्यशाला में बताया गया कि ग्वालियर-चम्बल सम्भाग के सात जिलों ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना, अशोकनगर, दतिया, गुना और श्योपुर में तीन सप्ताह तक टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में लोगों को सीधे तौर पर जोड़ने के लिए आमंत्रण पत्र बांटे जाएंगे।
इस आमंत्रण पत्र के माध्यम से टीकाकरण कराने वाले बच्चों तथा उनके माता-पिता के साथ-साथ आंगनवाड़ी, आशा तथा एएनएम का नाम दर्ज किया जाएगा। यूनीसेफ के चिकित्सक डॉ. गगन गुप्ता ने बताया कि आमंत्रण पत्र उन परिवारों को भेजे जाएंगे, जिनके बच्चे टीकाकरण की उम्र की सीमा में आते हैं।
ग्वालियर में महिला बाल विकास विभाग व संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ ) द्वारा आयोजित मीडिया कार्यशाला में बताया गया कि ग्वालियर-चम्बल सम्भाग के सात जिलों ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना, अशोकनगर, दतिया, गुना और श्योपुर में तीन सप्ताह तक टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में लोगों को सीधे तौर पर जोड़ने के लिए आमंत्रण पत्र बांटे जाएंगे।
इस आमंत्रण पत्र के माध्यम से टीकाकरण कराने वाले बच्चों तथा उनके माता-पिता के साथ-साथ आंगनवाड़ी, आशा तथा एएनएम का नाम दर्ज किया जाएगा। यूनीसेफ के चिकित्सक डॉ. गगन गुप्ता ने बताया कि आमंत्रण पत्र उन परिवारों को भेजे जाएंगे, जिनके बच्चे टीकाकरण की उम्र की सीमा में आते हैं।
वैक्सीन के तापमान पर है वायरलेस सिस्टम की नजर
29 जून 2011
भोपाल। टीकाकरण के लिए प्रयुक्त होने वाले वैक्सीन को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है। अभी तक इसके लिए तापमान पर सीधी नजर रखनी पड़ती थी, लेकिन भोपाल में वायरलेस सिस्टम के जरिए तापमान को नियंत्रित किया जाने लगा है। मध्य प्रदेश देश उन राज्यों में से है, जहां वैक्सीन के तापमान को नियंत्रित करने के लिए वायरलेस सिस्टम की मदद ली जा रही है।
सेहतमंद बचपन के लिए बच्चे को जन्म से दो साल की उम्र के बीच छह टीके लगाए जाते हैं, ताकि खसरा, टीबी, पोलियो सहित अन्य बीमारियां असर न डाल सकें। टीकाकरण में प्रयुक्त होने वाली दवा (वैक्सीन) को निर्धारित तापमान पर रखा जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि निर्धारित तापमान पर न रखे जाने से वैक्सीन बेअसर हो जाती है। इतना ही नहीं, उसका बच्चे पर प्रतिकूल असर तक पड़ सकता है।
वैक्सीन को जिस फ्रीजर में रखा जाता है, उस पर अभी तक सीधे व्यक्ति (मैनुअली) नजर रखता था, परंतु भोपाल के किलोल पार्क स्थित वैक्सीन स्टोर में वायरलेस सिस्टम के जरिए नजर रखी जा रही है। प्रदेश कोल्ड चेन के प्रभारी डा. विपिन श्रीवास्तव ने बताया है कि मुम्बई की एक कम्पनी द्वारा बनाए गए सॉफ्टवेयर की बदौलत तापमान पर आसानी से नजर रखी जा रही है।
29 Aug 2011
मध्य प्रदेश में टीकाकरण बढ़ा
मध्यप्रदेश में टीकाकरण अभियान को व्यापक समर्थन मिला है. महिला एवं बाल विकास विभाग ने राष्ट्रीय पोषण संस्थान हैदराबाद से मध्यप्रदेश में बाल एवं मातृत्व स्वास्थ्य पर एक अध्ययन करवाया है. इस अध्ययन की रिपोर्ट हाल ही में जारी कर दी गयी है. इस अध्ययन में टीकाकरण का का प्रतिशत ८४ हो गया है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के तीसरे दौर के मुताबिक यह ८४ प्रतिशत था. मध्यप्रदेश में कवरेज इवेलुशन सर्वे के मुताबिक यह ४२ प्रतिशत था. इस सर्वे की मानें तो टीकाकरण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश में काफी अच्छी तस्वीर सामने आती है.
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